महासभा का संविधान के उपेक्षा के कारण ही महासभा में विभाजन?

महासभा में राजनीतिक चेतना समिति का अगर गठन हुआ होता तो आज महासभा का इतनी बड़ी दुर्दशा नहीं होती ?
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2007 मैं ही महासभा के अंदर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, संविधान की धारा-13 ( 1- क) के अनुसार राजनीतिक चेतना समिति के नाम से उपसमिति के गठन का प्रावधान बनाया गया है!
इसके तहत यह व्यवस्था बनाई गई की

(1) यह समिति समाज के अंदर राजनीतिक चेतना लाने के लिए समस्त कार्य करेगी!
(2) यह समिति स्वतंत्र रूप से राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए सरकार और राजनीतिक दलों से बात करेगी!
(3) राजनीतिक मामले में इस समिति का सिफारिश पर महासभा कार्य करेगी
(4) इस समिति में सभी दल को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रावधान है!
परंतु दुर्भाग्य रहा की

2007 से जो भी अध्यक्ष महामंत्री महासभा बने, उन्होंने इस प्रावधान को लागू ही नहीं होने दिया!
बलिक सब कुछ अपने पास ही रखा? आज राजनैतिक कारणों के चलते महासभा आज अपना अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है!
महासभा के अंदर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच द्वंद युद्ध चल रहा है, और महासभा दल और नेता के आधार पर कई के भागों में विभाजित हो गया है!
एकीकरण टीम,,
अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा

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