प्रेस विज्ञप्ति


3 मार्च 2022


अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष , श्री अशोक कुमार आजाद ने, पत्र के माध्यम से महाभारत कालीन सम्राट जरासंध नगरी राजगीर ,नालंदा (बिहार)
में मगध् सम्राट जरासंध जी के धरोहरों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण , सम्राट जरासंध शोध संस्थान की स्थापना एवं राजगीर मैं सम्राट जरासंध जी का भव्य प्रतिमा लगवाने हेतु बिहार के महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री बिहार से गुहार लगाई है।

अध्यक्ष श्री आजाद ने यह आरोप लगाया है कि विभिन्न स्तरों पर प्रमाणित हो चुका है कि महाभारत कालीन मगध साम्राज्य के मगध सम्राट जरासंध जी का मुख्यालय एवं राज्य भवन राजगीर मे ही अवस्थित था, जिसके बहुत सारे अवशेष आज भी विराजमान हैं ,जैसे मगध सम्राट जरासंध अखाड़ा, स्वर्ण भंडार, साइक्लो पोलियन दीवाल, जरासंध की बैठका, राजगीर की प्राचीन दीवार, सिद्धनाथ मंदिर, गिरियक का किला , मनियार मठ इत्यादि दर्जनों ऐसे अवशेष बचे हैं जिसे महाभारत कालीन सम्राट जरासंध से जोड़कर देखा जा रहा है¡

फिलहाल जरासंध धरोहर के रूप में जो भी अब शेष बचे हैं उसे केंद्र सरकार के पुरातत्व एवं राज्य सरकार के वन विभाग विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है!

सम्राट जरासंध जी के राजगीर स्थित सभी धरोहरों का स्थिति देखरेख के अभाव में दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहा है!

बिहार सरकार के अधिकारी इन विषयों पर गंभीर नहीं दिख रही है,बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य और केंद्र सरकार इसकी उपेक्षा कर रही है।

दूसरी तरफ
महाभारत काल के बाद के, राजगीर के इतिहास से जो भी महापुरुष जुड़े रहे हैं उनके अस्तित्व को बचाने के लिए बिहार सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर सरकारी खर्च पर विकास का कार्य किए जा रहे हैं। सभी महापुरुषों का प्रतिमाएं लगाई गई है! उनके नाम से कई संस्थान बनाएं गए हैं!
किंतु इस दिशा में सम्राट जरासंध की उपेक्षा की जा रही हैं!
सम्राट जरासंध के नाम पर सरकार बिल्कुल उदासीन है।

सम्राट जरासंध अखाड़ा, साइक्लो पोलियन दीवाल, स्वर्ण भंडार ,जरासंध की बैठक, राजगीर का प्राचीन दीवार, गिरीयक का महल, मनियार मठ और सिद्धनाथ मंदिर इत्यादि जगहों पर जाने के लिए अब तक सुलभ रास्ते भी नहीं बनाए गए हैं , वहां कोई बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं होने के कारण
पर्यटको आने जाने में काफी परेशानी हो रही है और राजगीर जाकर वे इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों को देखने से वंचित रह जा रहे हैं।

बिहार सरकार तत्काल उन सभी जगहों पर जहां मगध सम्राट से संबंधित धरोहर है, वहां आने जाने के लिए सुलभ रास्ता, प्रकाश की व्यवस्था, उसके अगल-बगल साफ-सफाई समतलीकरण, पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधा इत्यादि की व्यवस्था तत्काल करें।

अध्यक्ष श्री आजाद ने मगध सम्राट जरासंध जी के धरोहरों का संरक्षण हेतु राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर एक संयुक्त योजना बनाने और सम्राट से जुड़े सभी ऐतिहासिक , धरोहरों को रहस्य का पता लगाने के लिए, जरासंध शोध संस्थान की स्थापना तथा राजगीर में मगध सम्राट जरासंध जी का भव्य प्रतिमा लगाने तथा प्रतिमान नहीं लगाने की स्थिति में चंद्रवंशी समाज के ऐतिहासिक संगठन (1906 मैं स्थापित और 1912 में निबंधित) अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा निबंधन संख्या (2145/ 1912 को) भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है, जरासंध जी कीड़ा जगत से जुड़े हुए थे , इसलिए राजगीर में जो स्टेडियम बनाया गया है उसका नामकरण सम्राट जरासंध स्टेडियम के नाम से किया जाए या अन्य कोई क्रीड़ा संस्थान उनके नाम से बनाने की मांग की है। अध्यक्ष श्री आजाद ने चंद्रवंशी समाज के लोकसभा सांसद श्री चंद्रशेखर प्रसाद चंद्रवंशी , बिहार विधान सभा के सदस्य डॉक्टर प्रेम कुमार , बिहार विधान परिषद के सदस्य प्रोफ़ेसर रामबली सिंह एवं प्रमोद सिंह चंद्रवंशी तथा झारखंड विधानसभा के सदस्य श्री रामचंद्र चंद्रवंशी जी सही संदर्भ में पहल करने की भी मांग की है।

महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अशोक सिंह ने आशा व्यक्त की है कि बिहार सरकार इस दिशा में कारगर कदम उठाएगी किंतु अगर
उदासीनता बरती गए तो सरकार सहित सभी संबंधित का ध्यानाकर्षण कराने हेतु मई माह के प्रथम सप्ताह में संपूर्ण भारतवर्ष क चंद्रवंशी समाज पटना में सांकेतिक ध्यानाकर्षण सत्याग्रह करने के लिए मजबूर हो जाएगा।

भवदीय

अशोक सिंह
(राष्ट्रीय महामंत्री)

अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा

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