अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा पर एक परिचर्चा एवं संवैधानिक सवाल?

अखिल भारतवर्षीय चंद्रवंशी क्षत्रिय महासभा पर एक परिचर्चा एवं संवैधानिक सवाल?

फिलहाल महासभा में दो समितियां सक्रिय और दोनों अपने आपको असली महासभा साबित करने की होड़ में रोड से कोर्ट तक लगे हुए हैं?
परंतु वास्तविक संवैधानिक स्थिति दोनों समितियों का क्या है,
एक नजर डालें इस विषय पर,
जानकारी के लिए
महासभा के मूल संविधान में चुनाव का अवधि 1 वर्ष का है।
2007 के रांची सम्मेलन में
संविधान में संशोधन किया गया
और चुनाव की अवधि 2 वर्ष निर्धारित की गई।
परंतु इसको संवैधानिक अमलीजामा आज तक नहीं पहनाया गया?
किंतु संगठन इसी संविधान के तहत चलना प्रारंभ हुआ।
अब एक नजर डालें डॉक्टर ईश्वर सागर जी और डॉक्टर प्रेम जी के नेतृत्व में चलने वाले समितियों पर,
(१) डॉक्टर सागर जी के नेतृत्व वाले समिति का संवैधानिक स्थिति:-
डॉ ईश्वर सागर जी का कहना है कि मैं अपने समिति का चुनाव
22 सितंबर 2016 को मारवाड़ी धर्मशाला रांची में किया हु।
संविधान के अनुसार इनका कार्यकाल समाप्त होता है
22 सितंबर 20 18को,
किंतु संविधान में एक व्यवस्था कि अगर निर्वाचित समिति अपने निर्धारित समय पर चुनाव नहीं करा पाता है तो उसे 3 महीना का और अतिरिक्त अवधि दिया जाएगा,
इस हिसाब से इनका अवधि समाप्त हो जाता है
22 दिसंबर 2018 को।
संविधान में एक और व्यवस्था है कि अगर अतिरिक्त अवधि के बावजूद भी समिति नहीं चुनाव करा पाती है तो उसी दिन से वह समिति स्वत:बर्खास्त मानी जाएगी और सारा अधिकार उच्च स्तरीय समिति के पास हस्तांतरित हो जाएगा!
और तत्काल 6 महीना के अंदर में उच्च स्तरीय समिति एक पदार्थ अध्यक्ष और महामंत्री को मनोनीत कर चुनाव समिति का गठन करा कर हर हाल में अगले सत्र के लिए पिछले साल के सदस्यता के आधार पर चुनाव संपन्न कराना हर हाल मेंअनिवार्य होगा।
इस तरह उच्च स्तरीय समिति का भी अवधि समाप्त हो जाता है
22 जून 2019 को?
परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ और डॉक्टर समय सागर जी का कहना है कि हमारा समिति ने अपना कार्यकाल खुद बढ़ा लिया है? और आज के दिनों में भी मेरी समिति संवैधानिक समिति है

अब आप तय करें कि आज उनक संवैधानिक स्थिति क्या है,?

संविधान किसी भी समिति को अपना कार्यकाल स्वय बढ़ाने का अधिकार किसी भी स्थिति में नहीं देता है?

अब एक नजर डॉक्टर प्रेम कुमार जी के समिति पर डालें:-
प्रेम जी अपने समिति का चुनाव
2015 के पहले करा लिए हैं
ऐसा बोलते हैं परंतु कोई निश्चित डेट या स्थान नहीं बताते हैं?
उनका यह भी कहना है कि मैं अपने संविधान में संशोधन कर लिया हूं और अपना कार्यकाल
2 साल के बजाय 3 साल कर लिया
हूं?

थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए
कि इनका कार्यकाल 3 साल का है और यह भी मान लिया जाए कि इनका चुनाव 2015 में हुआ
तो इनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है 2018
3 महीना+6 महीने का इनको भी अतिरिक्त समय मिला
तो इनका कार्यकाल समाप्त हो जाता है दो हजार अट्ठारह जून में।

परंतु आज भी वे अपने समिति को संवैधानिक समिति मान कर चल रहे हैं?

अब खुद विचार करें कि दोनों समितियों का आज के दिनों में संवैधानिक स्थिति क्या है?

एक और विचारणीय विषय है
कि संवैधानिक चुनाव को लेकर मामला 5 मार्च 2016 सिटी कोर्ट कोलकाता में विचाराधीन है।

सिटी कोर्ट, बेंच नंबर 8 ने अपने आदेश संख्या12, दिनांक 3 मार्च
2017 को एक आदेश जारी किया है की
कोई भी समिति अगर आज के दिन के बाद अपने समिति का चुनाव कराता है तो वह उसका परिणाम की घोषणा बिना कोर्ट के आदेश के नहीं कर सकेगा और न हीं वह चुनाव किसी भी स्थिति में लागू माना जाएगा?

इस आदेश के बाद आज तक किसी भी समिति के द्वारा कोर्ट में ना कोई चुनाव की सूचना दी गई है और नहीं वहां से कोई दूसरा आदेश प्राप्त कर सका है?
खुद विचार करें कि आज के दिनों में महासभा के इन दोनों समितियों का वास्तविक स्थिति क्या है?

यह जानकारी एकीकरण टीम
के सौजन्य से आम के निवासियों को सिर्फ जानकारी हेतु जारी।

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