Propose Constitution In Hindi

अखिल भारतवर्षीय चन्द्रवंषी क्षत्रिय महासभा
राँची सम्मेलन
दिनांक 18/02/2007
स्ंाषोधित संविधान का हिन्दी अनुवाद
1संस्था का नाम
अखिल भारतवर्षीय चन्द्रवंषी क्षत्रिय महासभा
3.कार्याकल
क) संस्था का निबंधित कार्यालय 19 नेताजी सुभाष रोड, कोलकाता - 800001
ख) आवष्यकतानुसार षाखा कार्यालय केन्द्रीय समिति की स्वीकृती से खोला जा सकेगा।
3.कार्यक्षेत्र
सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं विदेषों में बसे भारतीय मूल के चन्द्रवंषी क्षत्रियों की प्रतिनिधि सभा होगी किन्तु कार्यक्षेत्र भारतवर्ष ही होगी
4. उदेष्य
क) सम्पूर्ण भारतवर्ष के विभित्र भागों में बसे चन्द्रवंषी परिवारों को संगठित कर कुल का ज्ञान कराना तथा उनके आर्थिक समाजिक ाषैक्षणिक राजनीतिक संास्कृतिक स्वास्थय एवं न्यायिक हितों की रक्षा करना।
ख) समाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करना तथा बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि को दुर कर समाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करना।
ग) समाज के बेरोजगार युवक युवतियांे को सरकारी गैर सरकारी संस्थानों में नियोजन हेतु मार्गदर्षन देना एवं औद्यागिक, व्यावसायिक प्रषिक्षण केन्द्रों की स्थापना करना, षिक्षा का व्यापक प्रचार प्रसार करने हेतु ाषैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करना तथा खेलकूद के साथ समाज के विकाष हेतु अन्य सभी कार्य करना।
4. सदस्यता की षर्ते
क) कोई भी चन्द्रवंषी जिनकी उम्र 19 वर्ष से अधिक हो।
ख) संस्था के नियमोे एवं उदेष्यों का पालन एवं विष्वास करते हों अथवा इसके कार्यक्रमों में अभिरूचि रखते हों, संस्था के सदस्य बन सकते हैं।
ग) सदस्यता प्राप्ति हेतु विहित प्रपत्र में आवेदन करना होगा जिसकी स्वीकृति समिति द्वारा दी जायेगी।
घ) साधारण सदस्य बनने के लिए 5/ पांच रूपया, सक्रिय सदस्य बनने के लिए 24 साधारण सदस्य बनाना या 125/ एक सैा पचीस रूपया प्रति दो वर्ष पर जमा करना अनिवार्य होगा।
ड़) आजीवन सदस्य बनने के लिए एक मुष्त 2000/ दो हजार रूपया जमा करना होगा।
च) केन्द्रीय समिति सदस्यता षुल्क में संषोधन कर सकती है।
6. सदस्यता समिति की षर्ते
निम्नलिखित अवस्था में सदस्यों की सदस्यता समाप्त मानी जायगी।
क) स्वयं त्यागपत्र देने पर।?
ख) पागल या दिवालिया होने पर।
ग) मृत्यु होने पर।
घ) समिति द्वारा अविष्वास प्रस्ताव पारित होने पर।
ड़) सदस्यता षुल्क नहीं देने पर।
च) संस्था की बैठक में लगातार 3 तीन बार अनुपस्थित होने पर।
छ) न्यायालय द्वारा किसी आपराधिक मामले मे दंडित होने पर।
ज) संस्था के नियमों एवं उदेष्यों के विपरीत आचरण करने पर।
7. समिति का गठन
क) संस्था में निम्नलिखित समितियां एवं उपसमितियां होंगी।
1) केन्द्रीय समिति
2) राज्य समिति
3) जिला समिति
4) प्रखण्ड समिति/ नगर समिति
5) पंचायत समिति
6) ग्राम समिति/ वार्ड समिति
ख) उपसमितियांः
1) उच्च स्तरीय समिति
2) राजनीतिक चेतना समिति
3) महिला कल्याण समिति
4) सांस्कृतिक युवा समिति
5) विवाह समिति
6) षिक्षा समिति
7) विधि समिति
8) चिकित्सा समिति
9) प्रकाषन समिति
8. समिति के पदाधिकारियों का चुनाव
1) केन्द्रीय समिति
क) प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति के पष्चात तीन महीने के अन्दर चुनाव समिति का गठन कर, सक्रिय सदस्य द्वारा निर्वाचित विषेष प्रतिनिधियो के द्वारा आम सभा / सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री को चुनाव कराना अनिर्वाय होगा।
ख) निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री कम से कम 101 एक सौ एक तथा अधिक से अधिक 151 एक सौ एकावन सदस्यों की एक राष्ट्रीय समिति का गठन करेंगे।
ग) सभी उपसमितियों के लिए अध्यक्ष एवं महामंत्री को मनोनयन राष्ट्रीय अध्यक्ष् एवं राष्ट्रीय महामंत्री केन्द्रीय समिति केा विष्वास में लेकर करेंगे।
घ) यदि किसी कारणवष निधार्रित अवधि के अन्दर में निवर्तमान राष्ट्रीय समिति अगले सत्र के लिए चुनाव नहीं करा पाती है तो वैसी स्थिति में वह स्वतः भंग मानी जायेगी। ऐसी परिस्थिति मे उच्च स्तरीय समिति अगले सत्र के लिए तदर्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री का मनोनयन करेगी।
ड़) तदर्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री एक चुनाव समिति का गठन कर हर हाल मे 3 महीन के अन्दर उपरोक्त चुनाव सभी षर्ताे के अनुसार सम्पन्न् करायेंगे।
2) राज्य समिति
क) प्रत्यके दो वर्षेा की समाप्ती के 3 महीने के अन्दर केन्द्रीय समिति अपनी देखरेख में राज्य समिति के उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से राज्य के सक्रिय सदस्यों की आम सभा/ सम्मेलन में राज्य समिति के अध्यक्ष एवं महामंत्री का चुनाव सम्पन्न करायेगी।
ख) निर्वाचन अध्यक्ष एवं महामंत्री केन्द्रीय समिति को विष्वास में लेकर सेमिति का विस्तार करेंगे जिसकी संख्या कम से कम 51 या अधिक अधिक 101 एक सौ एक होगी।
ग) सत्र समाप्ति की तिथि से चुनाव होने की तिथि तक निवर्तमान समिति भंग मानी जायेगी और राज्य समिति के संचालन एवं अन्य सारे कार्य राज्य समिति की उच्चस्तरीय समिति द्वारा सम्पादित की जायेगी।
3) जिला समिति
क) प्रत्येक 2 वर्षो के समाप्ति के तीन महीनांे के अन्दर राज्य समिति की देखरेख में केन्द्रीय समिति से अनुमति प्राप्ति के पष्चात जिला के सक्रिय सदस्यों की आम सभा / सम्मेलन में जिला समिति की उच्च स्तरीय समिति जिला अध्यक्ष एवं महामंत्री का चुनाव करायेगी।
ख) निर्वाचन अध्यक्ष / महामंत्री राज्य समिति को विष्वास में लेकर समिति का विस्तार करेंगे जिसकी संख्या कम से कम 51 एवं अधिक से अधिक 75 की होगी।
ग) सत्र समाप्ति की तिथि से चुनाव होने की तिथि तक निवर्तमान समिति भंग मानी जायेगी और जिला समिति के संचालन एवं अन्य सारे कार्य जिला उच्चस्तरीय समिति द्वारा सम्पादित की जायेगी।
4) प्रखण्ड / नगर समिति
क) प्रत्यके दो वर्षों के समाप्ति के तीन महीने के अन्दर केन्द्रीय एवं राज्य समिति से अनुमाति प्राप्ति के पष्चात जिला समिति अपनी देखरेख में प्रखण्ड / नगर की उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से सक्रिय सदस्यों की आम सभा / सम्मेलन में अध्यक्ष एवं महामंत्री का चुनाव करायेगी।
ख) निर्वाचिन अध्यक्ष एवं महामंत्री जिल समिति को विष्वास में लेकर समिति का विस्तार करेंगे जिसकी संख्या कम से कम 31 एकतीस एवं अधिक से अधिक 51 होगी।
ग) सत्र समाप्ति की तिथि से चुनाव होने की तिथि तक निवर्तमान समिति भंग मानी जायेगी और प्रखण्ड/नगर समिति द्वारा सम्पादित की जायेगी। 5. पंचायत समिति
क) ) प्रत्यके दो वर्षेा की समाप्ती के 3 महीने के अन्दर जिला समिति की अनुमति से प्रखण्ड समिति अपनी देखरेख में पंचायत समिति की उच्चस्तरीय समिति द्वारा सक्रिय एवं आम सदस्यांे की आम सभा / सम्मेलन में अध्यक्ष एवं महामंत्री का चुनाव करायेगी।
ख) प्रखण्ड समिति को विष्वास में लेकर समिति का विस्तार किया जायेगा जिसकी संख्या कम से कम 11 एवं अधिक से अधिक 21 की होगी।
ग) सत्र समाप्ति के तिथि से चुनाव होने की तिथि तक निवर्तमान समिति भंग मानी जायेजी और पंचायत समिति के संचालन एवं सारं कार्य पंचायत उच्चस्तरीय समिति द्वारा सम्पादित की जायेगी।
6. ग्राम / वार्ड समिति
प्रत्येक दो वर्षो की समाप्ति के 3 महीने के अन्दर प्रखण्ड समिति की अनुमति के पष्चात पंचायत समिति अपनी देखरेख में ग्राम समिति के सक्रिय एवं साधारण सदस्यांे की आम सभा में एक ग्राम अध्यक्ष तथा चार सदस्यों का चुनाव सम्पन्न करायेगी।
1. उच्चस्तरीय समिति एवं उपसमिति का गठन
क) उच्च स्तरीय समिति - ग्राम समिति को छोड़कर पंचायत समिति से लेकर केन्द्रीय समिति तक एक उच्च स्तरीय समिति होगी। इस समिति का गठन संबंधित समितियांे द्वारा की जायेगी।
ख) अन्य सभी उपसमितियों का गठन केन्द्रीय समिति द्वारा केन्द्रीय स्तर पर की जायेगी। केन्द्रीय समिति द्वारा मनोनीत अध्यक्ष महामंत्री आवष्यकतानुसार अपनी समिति तथा षाखा का विस्तार करेंगे।
ग) उपसमितियों के लिए मनोनीत अध्यक्ष एवं महामंत्री केवल केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य ही हो सकेंगे। उपसमिति अपनी कार्य योजना की पुरी रूपरेखा केन्द्रीय समिति को देगी ततपष्चात् उस दिषा में कार्य करेगी।
10. कार्यकारिणी समिति के कार्य एवं अधिकार
क) संस्था के कार्य एवं योजनाओं पार निगरानी रखना एवं संबंधित पदाधिकरियों को अपेक्षित निर्दंेष देना।
ख) संस्था के चल अचल सम्पति के लिए उतरदायी होना।
ग) संस्था के सारे कार्येा का सम्पादन विधिवत करना और प्रस्ताव पारित करना एवं आवष्यकतानुसार उपसमितियों का गठन करना।
घ) संस्था के विरोध आचरण करने वाले एवं अनैतिक कार्य करने वाले सदस्यों के विरोध में अविष्वास प्रस्ताव पारित करना।
ड़) आम सभा की बैठक की तिथि स्थान एवं कार्यवाही निधार्रित करना।
च) संस्था की योजना एवं उसका बजट तैयार करना एवं पारित कर आमसभा के समक्ष रखना।
छ) संस्था में स्मृति एवं नियमावली में संसोधन के संबंध में अपनी अनुषंसा आम सभा के पास भेजना।
ज) उदेष्यों की पूर्ति हेतु अन्य वैधानिक कार्य करना।
झ) आम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव को कार्यरूप देना।
त्र) यदि कार्यकाल पूरा करने के पूर्व किसी कारणवष समिति में कोई पद रिक्त होगा तो उस पद पर मनोदयन करना।
11. सदस्यों के अधिकार
1) आजीवन सदस्य
क) आजीवन सदस्य किसी भी पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार हो सकेंगे तथा उन्हें संबंधित समितियों के लिए मताधिकार का अधिकार प्राप्त होगा।
ख) उच्चस्तरीय समिति में मनोनयन के समय समय सीमा की पाबन्दी इनके साथ नहीं होगी।
2) सक्रिय सदस्य
क) केन्द्रीय समिति के चुनाव को छोड़ कर सभी सम्बन्धित समितियों के चुनाव के लिए मतदाता होगे।
ख) सक्रिय सदस्य सभी समितियों के लिए चुनाव में उम्मीदवार एवं प्रतिनिधि होगें। ग) प्रत्यके 24 सक्रिय सदस्यों के अनुपात में केन्द्रीय समिति के चुनाव हेतु विषेष प्रतिनिधि का चुनाव अपनी षाखा में करेंगे।
3) साधारण सदस्य ग्राम समिति एवं पंचायत समिति के चुनाव में उम्मीदवार/ प्रत्याषी एवं मतदाता होंगे।
12. उच्चस्तरीय समिति की अधिकार
क) यह समिति वस्तुतः संबंधित समितियों के लिए निगरानी समिति होगी। प्रत्येक 6 माह पर या आवष्यकता पड़ने पर अधिक बार बैठक कर समिति की गतिविधियों की समीक्षा करेगी तथा अपने विचारों/ सलाहों से संबंधित समिति केा अवगत करायेगी।
ख) निर्धारित तिथि के अन्दर संबंधित समिति यदि चुनाव नहीं करा पाती हैं तो वैसी स्थिति में समिति संचालन का समस्त अधिकार स्वतः उच्चस्तरीय समिति के पास हस्तान्तरित हो जायेगी।
ग) अधिकार हास्तान्तरित होने के पष्चात संविधान में निर्धारित समय सीमा के अन्दर तदर्थ समिति का गठन कर चुनाव कराना अनिवार्य होगा।
13. उपसमितियांे के अधिकारः
1. क) संस्था के संविधान एवं नियमावली में वर्णित अधिकार के तहत समस्त् कार्य करेगी। उपसमिति के अध्यक्ष एवं मंत्री केन्द्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक अपने संबंधित महासभा की मुल षाखा के कार्यकारिणी के पदेन सदस्य होगे।
ख) उपसमिति एवं मुल समिति से संबंधित ाषाखा समिति में यदि किसी बिन्दु पर मतान्तर होता हैं तो आपस मे संयुक्त बैठक कर हल निकाला जायेगा। यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो केन्द्रीय समिति के पास समाधान हेतु अपील करेगी, जिनका निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
1. क) राजनीतिक चेतना समिति - यह समिति चन्द्रवंषियों में राजनीतिक चेतना के लिए समस्त कार्य करेगी।
ख) राजनीतिक दलों एवं सरकार में उचित हिस्सेदारी / भागीदारी के लिए कार्य करेगी।
ग) राजनीतिक फैसले में इनके सलाह / निणर्य को प्राथमिता दी जायेगी।
घ) केन्द्रीय समिति की अनुमति से राजनीति से संबंधित अन्य सभी कार्य करेगी।
ड़) महासभा के साधारण सदस्य सक्रिय सदस्य एवं आजीवन सदस्य बनाने का कार्य स्वतंत्र रूप् से करेगी।
च) महासभा के अन्दर सभी स्तर पर अपनी षाखा समिति स्वतंत्र रूप से गठन कर सकेगी।
छ) आजीवन सदस्यता ाषुल्क को छोड़कर सक्रिय सदस्यता एवं साधारण सदस्यता ाषुल्क से 75 प्रतीषत षुल्क इन्हें प्राप्त होगा जिससे ये स्वंय एवं अपनी षाखाओं का संचालन कर सकेंगे। 2) महिला कल्याण समिति -
क) महिलाआंे के कल्याण हेतु समस्त कार्य करेगी।
ख) राजनीतिक चेतना समिति के अधिकारानुसार अनुच्छेद ड़ से छ तक वर्णित सारे अधिकार प्राप्त होंगे।
3) युवा समिति -
क) युवा वर्ग के कल्याण, सांस्कृतिक विकास एवं अन्य कार्य करेगी।
ख) राजनीतिक चेतना समिति के अनुच्छेद ड़ से छ तक में प्रदत सारे अधिकार प्राप्त होेेंगे।
ग) युवा समिति के सदस्य 18 वर्ष से 35 वर्ष उम्र के ही होंगे।
4) विवाह समिति -
क) दहेज प्रथा उन्मुलन एवं ाषादी विवाह की समस्या को आसान एवं सरल बनाने की दिषा में समस्त कार्य करेगी।
ख) सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने के लिए समस्त कार्य करेगी एवं प्रत्येक वर्ष हर स्तर पर समुहिक विवाह का आयोजन करेगी।
ग) राजनीतिक चेतना समिति के अनुच्छेद ड़ से छ तक में सारे अधिकार प्राप्त होंगे।
5) षिक्षा समिति -
क) षिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए समस्त कार्य करेगी।
ख) छात्रो को संगठित कर गरीब मेधावी छात्रों की षिक्षा से संबंधित समस्याओं को हल करेगी।
ग) छात्रावास, विद्यालय, पुस्तकालय, वाचनालय एवं अन्य षिक्षा से संबंधित संस्थानों की स्थापना एवं संचालन हेतु समस्त कार्य करेगी।
घ) इस उपसमिति के सदस्य एवं पदाधिकारी केवल छात्र एवं षिक्षक ही हो सकेंगे।
6) विधि समिति -
क) देष के समस्त चन्द्रवंषीयों विषेष कर निर्धन तबके के लिए उचित न्याय दिलाने के दिषा में समस्त कार्य करेगी। निर्दोष एवं असहाय चन्द्रवंषियों को न्याय से संबंधित हर सुविधा सुहैया करायेगी।
ख) जेल में बन्द निर्दोष कैदियांे को उचित न्याययिक सुविधा उपलब्ध करायेगी।
ग) चन्द्रवंषी अधिवक्ताआंे को देष के स्तर पर संगठीत कर चन्द्रवंषीयों में कानुन के संबंध में चेतना लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
घ) राजनीतिक चेतना समिति के अनुछेद ड़ से छ तक मे प्रदत सारे अधिकार प्राप्त होंगे। 7) चिकित्सा समितति -
क) जरूरतमन्द लोगो के बीच मुफत चिकित्सा षिविर आयोजित करेगी।
ख) स्वस्थ्य से संबंधित सभी विषयों पर कार्य करेगी।
ग) अस्पताल एवं स्वस्थ्य केन्द्र की स्थापना कर आम जरूरतमन्दांे को मुफत एवं सस्ता इलाज उपलब्ध करायेगी।
घ) राजनीतीक चेतना समिति के अनुच्छेद ड़ से छ तक मे प्रदत सभी अधिकार प्राप्त होगें।
8) प्रकाषन समिति -
क) साहित्य एवं पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से समाज मे फैले कुरूतियों को दुर करने हेतु समस्त कार्य करना।
ख) मासिक त्रैमासिक स्मारिका एवं विषेष बुलेटिन अदि का प्रकाषन करना।
ग) केन्द्रीय समिति की अनुमाती से प्रकाषन संबंधि सभी कार्य करना।
घ) इस समिति में प्रधान संपादक - 1 सहायक संपादक 2 विज्ञापन प्रबंधक 2 एवं अन्य 6 सहायोगी सदस्य होगे।
14. पदधिकारियों के कार्य एवं अधिकार
क) अध्यक्ष
1) संस्था की प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता करना।
2) संस्था की कार्यवाही पंजी में हस्ताक्षर करना।
3) किसी बैठक में समान मत की स्थिती में निर्णायक मत देना।
4) संस्था की गतिविधियों पर निगरानी रखना।
5) किसी तरह की बैठक बुलाने हेतु सचिव को परामर्ष देना।
6) आवष्यकतानुसार किसी दुसरे संगठन की बैठक में स्ंास्था का प्रतिनिधित्व करना।
ख) उपध्यक्ष
1) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष के आदेषानुसार अध्क्षय का सभी तरहा का कार्य करना।
ग) महामंत्री
1) बैठक का अयोजन करना।
2) संस्था की ओर से पत्राचार करना।
3)प्रत्येक पंजी एवं कागजात को सुरक्षित रखना।
4)संस्था की आय-व्यय को अंकेक्षण कराना।
5) बैठक की कार्यवाही को पंजी में अंकित करना।
6) संस्था की चल अचल सम्पति पर निगरानी रखना।
7) अध्यक्ष के राय से अन्य कार्य करना।
घ) कोषाध्यक्ष -
1) कार्यकारिणी समिति द्वारा सौंपे गये वितिय कार्य एवं दायित्व को पुरा करना।
2) समिति के आय व्यस का हिसाब रखना। आय व्यय का लेखा तैयार करना एवं
सुरक्षित रखने में सचिव/ महामंत्री का सहयोग करना।
3)आमसभा में आय व्यय लेखा प्रस्तुत करने में महामंत्री की सहयोग करना। उसे बैठक
में रखना तथा पूछे गये प्रष्नों के उतर देना।
4) सदस्यता ाषुल्क इत्यदि सभी राषि प्राप्त कर रसीद निर्गत करना।
5) समिति के कोष निर्धारित बैंक या डाकघर में समिति के नाम पर जमा करना।
6) कार्यकारिणी समिति की बैठक में वितीय प्रष्नों का जवाब देना।
ड़) समिति के अन्य पदाधिकारी-
1) कार्यकारिणी समिति अध्यक्ष एवं महामंत्री के निर्देषानुसार कार्य करना।
15. आम सभा के कार्य एवं अधिकार
क) कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष एवं महामंत्री का निर्वाचन करना।
ख) संस्था के योजना बजट अंकेक्षित लेखा एवं प्रगति प्रतिवेदन को परित करना।
ग) संस्था क ेलेखा को अंकेक्षण हेतु अंकेक्षक की नियुक्ति करना।
घ) संस्था के स्मृती पत्र एवं नियमावली में संषोधन करना।
ड़) संस्था के विघटन पर निर्णय लेना।
च) अध्यक्ष की राय से अन्य विषयों पर विचार करना।
छ) संस्था के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन को पारित करना।
16. बैठक
क) आमसभा की बैठके - आम सभा की वार्षिक बैठक वर्ष में एक बार होगी तथा आम सभा की विषेष बैठक कभी भी बुलायी जा सकती हैं
ख) आम सभा के एक तिहाई सदस्यों की लिखित मांग, जिसमें अधियाचना करने वाले सदस्यों का हस्ताक्षर एवं बैठक में विचारणीय विषयों का स्पष्ट उलेख रहेगा पर अधियाचना प्राप्ति के 60 दिनांे के भीतर संस्था के महामंत्री को आम सभा की बैठक बुलानी होगी। यदि 60 दिनांे के अन्दर संस्था के महामंत्री / अध्यक्ष द्वारा बैठक नहीं बुलायी जायेगी तब अधियाचना करने वाले सदस्यों को अधिकार होगा कि आम सभा के सभी सदस्यों केा सूचना भेजकर आमसभा की अधियाचित बैठक में अधियचना में अंकित विषय पर निर्णय ले सकते हैं। लेकिन आम सभा की बैठकों में कम से कम कुल सदस्य संख्या के 50 प्रतिषत $1 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
1) केन्द्रीय समिति -
केन्द्रीय समिति की बैठक प्रत्येक चार महीनों के अन्दर बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है।
2) राज्य समिति - प्रत्येक तीन महीने के अन्दर राज्य समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है। बैठक में लिए गये निर्णय का प्रतिदिन केन्द्रीय समिति एवं संबंधित समिति को 10 दिनों के अन्दर में जारी करना अनिवार्य होगा।
3) जिला समिति - प्रत्येक दो महीने के अन्दर जिला समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है। बैठक में लिए गये निर्णय का प्रतिवेदन राज्य समिति एवं संबंधित समिति को भेजना अनिर्वाय होगा।
4) प्रखण्ड/नगर समिति- प्रत्येक महीने के अन्दर प्रखण्ड/नगर समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है। बैठक में लिए गये निर्णय का प्रतिवेदन जिला समिति एवं संबंधित समिति को भेजना अनिर्वाय होगा।
5) पंचायत समिति- प्रत्येक महीने में दो बार पंचायत समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है। बैठक में लिए गये निर्णय का प्रतिवेदन प्रखण्ड/नगर समिति एवं संबंधित समिति को भेजना अनिर्वाय होगा।
6) ग्राम समिति/ वार्ड समिति- सप्ताह में एक बार ग्राम समिति/ वार्ड समिति की बैठक बुलाना अनिवार्य होगा। विषेष परिस्थिति में बैठकें कभी भी बुलायी जा सकती है। बैठक में लिए गये निर्णय का प्रतिवेदन प्रखण्ड/नगर समिति एवं संबंधित समिति को भेजना अनिर्वाय होगा।
17. बैठक का कोरम
क) समिति के कुल सदस्यों की संख्या का एक तिहाई भाग को उपस्थित होना अनिर्वाय होगा। कोरम के आभाव मे स्थगित बैठक के लिए दुसरी तिथि उसी दिन तय की जायेगी जिसके लिए सूचना सभी संबंधित को लिखित रूप से दी जायेगी। एस बैठक में कोरम की संख्या का कोई मानदण्ड नहीं होगा।
ख) निर्धारित बैठक नहीं हो पाने की स्थिति में संबंधित सभी समितियों एवं उपसमितियां केा कारण बताना होगा। लेकित हर हालत में अगली बैठक करना अनिर्वाय होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित समिति को निलम्बित माना जायेगा।
18. बैठक की सूचना
क) बैठक की सूचना बैठक की तिथि से केन्द्रीय समिति 15 दिन राज्य समिति 10 दिन जिला समिति 7 दिन पंचायत समिति एवं ग्राम समिति/ वार्ड समिति 48 घंटा पूर्व सभी सदस्यों को सूचना देना अनिर्वाय होगा।
ख) बैठक की सूचना निबंधित डाक या सूचना बही मंे हस्ताक्षर कराकर जा सकती हैं।
19. आय का स्त्रोत
क) सदस्यों का प्रवेष षुल्क एवं सदस्यता षुल्क
ख) सरकारी एवं गैर सरकारी अनुदान
ग) साधारण सदस्यता सक्रिया सदस्यता एवं आजीवन सदस्यता रसीद के साथ सभी तरह के अनुदान तथा विषेष चंदा का रसीद केवल राष्ट्रीय महामंत्री के हस्ताक्षर से ही निर्गत होगा। कोई भी ाषाखा समिति एवं उपसमिति की ाषाखा समिति इसके लिए प्रधिकृत किसी भी स्थिति में नहीं होगें। घ) विषेष षुल्क एवं दान।
ड़) सांस्कृतिक कार्यक्रम के सहयोग राषि द्वारा।
च) साहित्य एवं अन्य रचनाओं द्वारा
छ) चल अचल सम्पति के उपयोग द्वारा
20. कोष की व्यवस्था एवं बैंक खाते का संचालन
क) संस्था को प्राप्त होने वाली सभी राषियां संस्था के नाम किसी राष्ट्रीय बैंक / डाकघर में खुल खाते में सभी समितियां द्वारा रखी जायेगी।
ख) रकम की निकाषी संस्था के अध्यक्ष कोषध्यक्ष एवं महामंत्री के हस्ताक्षरों में किसी दो के हस्ताक्षर से होगा। लेकिन हर हाल में कोषध्यक्ष का हस्ताक्षर अनिर्वाय होगा।
ग) केन्दीय समिति के अलावे सभी राज्य, जिला, प्रखण्ड नगर , पंचायत, ग्राम समिति/वार्ड समिति तथा सभी उपसमितियों को भी संस्था के नाम बैंक खाता किसी भी राष्ट्रीय बैंक /डाकघर में खोलना अनिर्वाय होगा। इसके लिए केन्द्रीय समिति का अनुमति लेना आवष्यक है।
21. सदस्यता राषि का वितरण
क) आजीवन सदस्यता षुल्क केन्द्रीय कोष में रहेगी।
ख) साधारण एवं सक्रिय सदस्यों से प्राप्त राषि से केन्द्रीय समिति को 25 प्रतिषत राज्य एवं जिला समिति का 20 प्रतिषत प्रखण्ड/नगर समिति केा 15 प्रतिषत पंचायत समिति एव ग्राम/वार्ड समिति को दस प्रतिषत मिलेगी।
ग) उपसमितियां अलग महासभा की सदस्यता अभियान चलायेगी जिसमें से 25 प्रतिषत केन्द्रीय समिति को मिलेगी एवं षेष 75 प्रतिषत उपसमितिया तथा अपने सहायक समितियां के बीच बँटवारा करेगी जिसके अनुमति केन्द्रीय समिति से लेना होगा।
22. समिति एवं उपसमितियांे का कार्यकाल
क) सभी समितियों का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।
ख) कार्य वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होगा।
ग) कोई भी सदस्य को किसी भी स्थिति में केन्द्रीय समिति / ाषाखा समिति तथा उपसमिति के अध्यक्ष एवं महामंत्री के पद पर लगातार दो सत्र से ज्यादा निर्वाचित एवं मनोनीत नहीं किया जा सकेगा।
23. पदाधिकारियों की संख्या

             
अध्यक्ष            
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             
             

 

24. अचार संहिता एवं उपनियामवली
क) सभी संबंधित ाषाखा समिति एवं उपसमिति अपने कार्या एवं दायित्वों के भलीभांति निर्वाह हेुतु आचार संहिता/उपनियमावली बनाने के लिए स्वतंत्र होगी। किन्तु हर हाल में केन्द्रीय समिति की अनुमति/ सहमति अनिर्वाय होगी।
ख) संस्था के अन्दर कोई भी विवाद का निपटारा हेतु सभी षाखा एवं उपसमितियों कों केन्द्रीय समिति के पास अपील करने का अधिकार होगा किन्तु केन्द्रीय समिति का फैसला अंतिम फैसला माना जायेगा।
25. अंकेक्षण
क) संस्था का लेखा नियमित रूप से रखा जाएगा तथा प्रत्येक सत्र के लिए आम सभा द्वारा नियुक्त मान्यताप्ता चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट से प्रतिवर्ष अंकेक्षण कराया जायेगा।
ख) सभी ाषाखा एवं उपसमितियों को लेखा (आय-व्यय) का अंकेक्षण कराने हेतु 15 अप्रैल तक हर हालत में केन्द्रीय समिति के कोषाध्यक्ष एवं महामंत्री के पास जमा करना होगा।
ग) आय-व्यय का ब्यौरा समय पर जमा नहीं करने की स्थिति में महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष को अपने पद से निलंबित होना पड़ेगा और वरीय संयुक्त मंत्री एवं सहायक कोषाध्यक्ष क्रमषः महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष का कार्यभार देखेगें।
घ) आय- व्यय समय पर नहीं जमा करने वाले महामंत्री कोषाध्यक्ष के विरू़द्ध अन्य कानूनी कार्यवाई की जायेगी।
26. संषोधन
संस्था का स्मृति पत्र एवं नियमावली में कोई भी संषोधन संस्था की आम सभा के दो तिहाई सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पारित करने पर ही किया जायेगा तथा संस्था निबंधन अधिनियम एवं पश्रिम बंगाल संस्था नियमावली के संगत नियमों का पूर्णतः पालन किया जायेगा।
27. पंजी का निरीक्षण
संस्था की सभी पंजियां संस्था के निबंधित प्रधान कार्यालय में संस्था के महामंत्री या उनके द्वारा प्राधिकृत प्रतिनिधि के जिम्मे होगा, जहां कोई भी सदस्य या सरकारी अधिकारी महामंत्री की अनुमति से उसका निरीक्षण कर सकते हैं।
28. कानूनी कारवाई
संस्था द्वारा या संस्था के विरोध कोई भी कानूनी कारवाई संस्था के महामंत्री के पदनाम के हेागा।
29. संस्था का विघटन
क) यदि किसी कारणवष संस्था का विघटन करने की आवष्यकता कार्याकारिणी समिति द्वारा समझी जायेगी एवं कार्याकारिणी समिति तसंबंधी प्रस्ताव पारित कर उसे आमसभा की विषेष बैठक में रखेगी। आमसभा के तीन चैथाई सदस्यों के बहुमत से ही संस्था के विघटन पर निर्णय लिया जायेगा तथा उसे पुनः आम सभा की दूसरी विषेष बैठक के तीन चैथाई बहुमत से संपुष्ट कराने के बाद ही विघटित होगी।
ख) विघटन के बाद सभी दायित्वों के सामंजन के बाद संस्था की जो भी संपति षेष रहेगी वेा संस्था के किसी सदस्य या वाहा व्यक्ति को नहीं दी जायेगी, बल्कि आमसभा के तीन चैथाई बहुमत से समान उदेष्य वाली संस्था में से किसी संस्था को दे दी जायेगी।
ग) संस्था के विघटन के समय संस्था निबंधन अधिनियम का पूर्णतः पालन किया जायेगा।
प्रमाणित किया जाता है कि यह अखिल भारतवर्षीय चन्द्रवंषी क्षत्रिय महासभा निबंधन संख्या 2154/1912 नामक संस्था के संषोधित संविधान नियमावली का सच्ची प्रति है।
सुरेन्द्र सिंह षिव पुजन सिंह
राष्ट्रीय अध्यक्ष (का0) राष्ट्रीय महामंत्री (का0)




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