*शुभ प्रभात/नमस्कार/प्रणाम चन्द्रवंशी समाज*_
_*प्यार/आभार*_
_*🌹!!सामूहिक विवाह आज की सबसे बडी जरूरत !!🌹*_

_*💫अखिल भारतीय चन्द्रवंशी समिति कई वर्षों से लगातार चन्द्रवंशी समाज के बर-बधुओं को सामूहिक विवाह कराते आ रही है। प्रिये देव सर का चन्द्रवंशी सगाई ग्रुप एवं प्रिये भाई बृजेश जी का चन्द्रवंशी मैट्रिमोनियल, चन्द्रवंशी समाज बर-बधु विवाह हेतु मील का पत्थर साबित हो रहा है। वैसे व्यक्ति जो चन्द्रवंशी समाज हेतु अहम कार्य कर रहें हैं उनकी प्रशंसा बनता है। यह प्रशंसनीय एवं सराहनीय है। इसके लिए आप चन्द्रवंशी मैट्रिमोनियल ग्रुप एवं चन्द्रवंशी सगाई ग्रुप पर आप अपना (बर-बधु) का बायो-डाटा दे सकते हैं। सामूहिक विवाह हेतु नेक कार्य महान व्यक्तित्व सुरेंद्र सिंह चन्द्रवंशी जी एवं उनके टीम के द्वारा की जाती है। इसके लिए Marriage Registration प्रारम्भ है। Harry up!*_

_*💥सामूहिक-विवाह कार्य-क्रम💥*_
_*दिनांक-29th APRIL 2018*_
_*स्थान-गया (बिहार)*_
_*में होने जा रहा है।*_

_*💫आइये जानते हैं क्या है सामूहिक विवाह???*_

_*कई लड़कियों की शादी करने में तो पिता की कमर ही टूट जाती है। विवाह के लिए लिया गया कर्ज बाकी की जिंदगी को भी दुश्वार कर देता है। इन सब स्थिति से बचने के लिए जरूरतमंद परिवार की कन्याओं के खर्च बगैर विवाह के लिए सामाजिक संस्थाओं की भूमिका सराहनीय हो जाती है।*_

_*💫कुछ वैवाहिक संस्थाएं योग्य वर-वधू हेतु बायोडाटा एक्सचेंज करते हैं।कहा गया है कि किसी कमजोर, जरूरतमंद या असहाय परिवार की कन्या का विवाह करानें से बढ़कर कोई अन्य पुनीत कार्य नहीं है। इस बात का प्रमाण है कि आज हर छोटे-बड़े जिलों, कस्बों या शहरों में कई वैवाहिक संस्थाएं मिलजुकर सैकड़ों कन्याओं के हाथ सामूहिक विवाह के माध्यम से पीले कर रही हैं। जिनमें से कुछ सर्वजातीय वैवाहिक समितियां तथा कई सजातीय संस्थाएं क्रमश: सभी जातियों के तथा अपनी जाति के सामूहिक विवाह में सक्रिय हैं। ये संस्थाएं विवाह जैसे सामाजिक पुण्य कार्य में अपनी सराहनीय भूमिका निभाती हैं। प्रशंसनीय बात यह भी है कि अब इन सामूहिक वैवाहिक कार्यक्रमों में अपेक्षाकृत अच्छी संख्या देखी जा रही है। इन संस्थाओं के बैनरतले शादियां कराने पर समय की बर्बादी, दान-दहेज व फिजूलखर्ची जैसी कुरीतियों से भी समाज को मुक्ति मिल सकती है। लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि समाज का बड़ा वर्ग भी इसमें सम्मिलित हो ताकि कोई भी जरूरतमंद व कमजोर परिवार अपनी नजरों में हीन व हास का पात्र न महसूस करे।*_

_*💫आज शादी-विवाह समाराहों में खर्च होने वाला अनाप-शनाप पैसा बिल्कुल पानी की तरह बहाया जाता है, जो कहीं-कहीं पर अप्रासंगिक सा लगता है। यह अनावश्यक खर्च फिजूलखर्च की श्रेणी में ही गिना जाता है। आज योग्य वर को पाने के लिए भी दान-दहेज के रास्ते पर चलने से भी नहीं बचा जा सकता है। दहेज के सामान की मांग व मोटी रकम दिये बगैर अच्छा जीवन साथी मिलनाआसान नहीं होता। सबसे पहले अच्छे दूल्हे की बड़ी कीमत होती है, कीमत को चुकाने की स्थिति में ही शादी की बात आगे बढ़ती है। नहीं तो, बात खत्म।*_

_*💫अपनी जेब के हिसाब से दूल्हा ढूंढऩा पड़ता है क्योंकि आज दूल्हे खरीदे जाते हैं। कई जगह बड़े या सक्षम लोग अपनी मर्जी से लड़के पक्ष को दान-दहेज से लाद देते हैं। ऐसे लोग समाज में अपनी हैसियत का उच्च प्रदर्शन करते हैं, जिसमें अपना स्टेटस व रुतबा दिखाना भी खास मकसद होता है। अक्सर ऐसा दिखावटी प्रदर्शन विभिन्न वर्गों के बीच प्रतियोगिता का रूप भी ले लेता है। फिर किसी की बराबरी करने के लिए शादी समारोह में अपना भी रुतबा दिखाने के लिए आम आदमी कर्जदार भी बन जाता है। क्योंकि कई लड़कियों की शादी करने में तो पिता की कमर ही टूट जाती है, इस प्रकार विवाह के लिए लिया गया कर्ज बाकी की जिंदगी को भी दुश्वार कर देता है। इन सब स्थिति से बचने के लिए जरूरतमंद परिवार की कन्याओं के खर्च बगैर विवाह के लिए ऐसी संस्थाओं की भूमिका सराहनीय हो जाती है। कुछ वैवाहिक संस्थाएं योग्य वर-वधू हेतु परफेक्ट पेयर मैचिंग के लिए बायोडाटा एक्सचेंज करने का काम भी सुलभ कराती हैं। अपनी मनपसंद दूल्हा-दुल्हन का चयन होने तथा रिश्ता तय हो जाने से विवाह तक की पूरी जिम्मेदारी वैवाहिक संस्था की होती है। सामूहिक विवाह कराने वाले संगठन नव विवाहित जोड़ों को गुजर-बसर करने के लिए घर-गृहस्थी का जरूरी सामान विदाई के समय उपहार स्वरूप भी देते हैं। इतना सब होने पर भी सामूहिक विवाह कराने वाली संस्थाएं प्रचार व प्रसार के जरिये ऐसे परिवारों की खोजबीन में लगी रहती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों की कन्याओं का विवाह कराया जा सके।*_

_*💫परन्तु , देखने में यह भी आता है कि अपनी लड़की की शादी आदि के लिए व्यवस्था-इंतजाम आदि न कर पाने पर भी कुछ परिवार सामूहिक विवाह में आने से कतराते है। इसका एक दूसरा पहलू भी हमारा समाज है, क्योंकि इन्हें समाज का डर भी सताता है कि अपने लोगों के बीच कहीं हंसी की बात न हो जाये। हमारे समाज की विडम्बना भरी विचारधारा यह भी है कि सामूहिक विवाह केवल निम्न वर्गों के लिए ही उपयुक्त है। क्योंकि जिनके पास शादी आदि के लिए खर्च की व्यवस्था नहीं है, वही लोग इसका लाभ लेने के योग्य हैं। जबकि सच यह है कि किसी समाज का निर्माण सभी वर्गों के एकसाथ समाहित होने पर ही होता है। दिखता यह है कि ऐसे सामूहिक सामाजिक विवाह समारोहों में बड़े वर्ग की हिस्सेदारी व सहभागिता नगण्य सी है। मध्यम वर्ग के लोगों के आयोजनों में आने से निश्चित तौर पर जरूरतमंद परिवारों की संख्या में और भी इजाफा होगा। सजातीय वैवाहिक संस्था से जहां *पर जाति-विशेष को बल मिलता है, वहीं पर सर्वजातीय विवाह कराने से समाज की ताकत भी मजबूत होती है। सामूहिक विवाह का फायदा यह भी है कि इससे अनावश्यक खर्च की बचत के साथ दबावग्रस्त दान-दहेज देने की मजबूरी से भी छुटकारा मिल सकता है। जहां पर शादियों में दहेज एक अभिशाप है वहीं पर विवाह आदि पर किया गया अनाप-शनाप खर्च समाज के विभिन्न वर्गों के बीच हीन भावना भी पैदा करता है। सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने तथा अन्य वर्गों को जागरूक करने की हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी भी बनती है। सामूहिक विवाह समाज में सामाजिक एकता व जागरुकता लाता है।-

SAMUHIK VIVAH COMMITTEE TEAM